Sunday, September 7, 2008

औरंगजेब की नजर में इल्म

धारणा या छवियां जिनके लिए सबसे ज्यादा नुकसानदेह होती हैं वे हैं हमारे इतिहास पुरुष। जब हम उन्हें किसी खास नजरिए से देखने के आदी हो जाते हैं तो उनके व्यक्तित्व के कुछ उजले पक्षों को जानने से महरुम हो जाते हैं। औरंगजेब को ऐसे ही शासकों में शुमार किया जा सकता है। इतिहास में उसे एक कटटर शासक के रुप में याद करता है लेकिन उसने अदब और तालीम के बारे में जो बातें कहीं हैं वे आज की दुनिया में भी महत्व रखती हैं। उसके दरबार में रहने का अवसर पाने वाले फ़्रांसीसी यात्री बरनियर ने एक घटना का जिक किया है जो शिक्षा संबंधी उसके विचारों पर प्रकाश डालती है। बरनियर ने लिखा है कि औरंगजेब का गुरु मुललासालह इस आशा से उसके दरबार में आया कि औरंगजेब उसे दरबार में अमीर बना देगा । पर अपनी बहन रोशनआरा बेगम की सिफारिश के बावजूद औरंगजेब ने तीन महीने तक उसकी खबर तक न ली। परंतु जब वह उसे दरबार में देखते-देखते तंग आ गया तो उसे एकांत में दरबार में उपस्थित होने का आदेश दिया और मुल्ला जी से कहा कि- आप चाहते हैं कि हम आपको दरबार के उमरा में शामिल कर लें लेकिन क्या आप इसके काबिल हैं। फरमाइये तो सही कि आपकी तालीम से मुझे कौन सी वाकफीयत हासिल हुई है---क्या मुझ जैसे शख्स के उस्ताद को लाजिम न था कि दुनिया की हरएक कौम के हालात से मुझे मुत्तिला करता ---मुझको इलम तारीख ऐसी सिलसिलेवार पढाता कि मैं हर एक सलतनत की बुनियाद असबाब तरककी और उन वाकयात से वाकिफ हो जाता जिनके वायस उनमें इनकलाबात होते रहते हैं----बावजूद कि बादशाह को हमसाया कौमों की जबानों से वाकिफ होना जरुरी है आपने मुझको अरबी पढना सिखाया। इस जबान को सीखने में मेरी उमर का एक बडा हिससा जाया हुआ। कया नमाज सिरफ अरबी के जरिए ही अदा हो सकती है और बडी-बडी इलमोहुनर की बातों को जानना क्या अरबी के जरिए ही हो सकता है---आप मुझे वे बातें सिखाते जिससे जेहन इस काबिल हो जाता है कि बगैर सही दलील के किसी बात को तसलीम नहीं करता---वह सबक पढाते जिससे इंसान की तबीयत ऐसी हो जाती कि दुनिया के इंकलाबात का उसपर कुछ भी असर नहीं होता है और वह तरककी और तनजजुली की हालत में एक सा ही रहता है। क्या आप नहीं जानते थे कि शहजादों को इतनी बात जरुर सिखानी चाहिए कि उनकी रियाया से और रियाया को उनके साथ किस तरह का बरताव करना लाजिम है---बस अपने गांव को चले जाइए और अब से कोइ न जाने कि आप कौन हैं और आपका क्या हाल है।

6 comments:

अनुनाद सिंह said...

किसी व्यक्ति के काम ही उसके विचारों की वास्तविक व्याख्या हैं; ज्यादा क्या कहूँ?

Nasiruddin said...

मेरे जैसे इतिहास अज्ञानी के लिए अच्‍छी जानकारी दी। विस्‍तार में लिखें तो और जानकारी मिले। यह लाइन बहुत अहम है-
कया नमाज सिरफ अरबी के जरिए ही अदा हो सकती है और बडी-बडी इलमोहुनर की बातों को जानना क्या अरबी के जरिए ही हो सकता है---आप मुझे वे बातें सिखाते जिससे जेहन इस काबिल हो जाता है कि बगैर सही दलील के किसी बात को तसलीम नहीं करता-।

Shastri said...

"धारणा या छवियां जिनके लिए सबसे ज्यादा नुकसानदेह होती हैं वे हैं हमारे इतिहास पुरुष।"

एकदम सही बात कही आप ने !!!



-- शास्त्री जे सी फिलिप

-- हिन्दी चिट्ठाकारी के विकास के लिये जरूरी है कि हम सब अपनी टिप्पणियों से एक दूसरे को प्रोत्साहित करें

Udan Tashtari said...

सही है!

Anonymous said...

correct absolutely correct.i am not reading this meteor before from anybody.

only1gogy said...

correct absolutely correct i am not read this information from other