Monday, January 26, 2009

कैसे गाऊं जन गण मन

नवभारत टाइम्स की वेब साइट पर यह खबर देखकर मैं सिहर उठा। यह खबर ही अपने आप में एक सवाल है आप भी यह खबर पढे़
मां ही बनी 'कंस', बच्ची को पटक-पटक कर मार डाला
मुंबई।। मुंबई में एक महिला ने अपनी बच्ची को पैदा होते ही पटक-पटक कर मार डाला और फिर शव को पॉलिथिन बैग में बंद कर कूड़ेदान में फेंक दिया। इस दिल दहला देने वाली वारदात को अंजाम देने में उसकी मां, बहन और भाई ने भी मदद की। महिला ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने बताया कि बच्ची के पिता ने उससे शादी से इनकार कर दिया था। घरवालों के दबाव में उसने इस वारदात को अंजाम दिया।
भायंदर स्थित प्रतीक बिल्डिंग में रहने वाली शेफाली सेठ (28) ने 15 जनवरी को घर पर ही एक बच्ची को जन्म दिया था। डिलिवरी बाथरूम में कराई गई। इसमें उसकी मां, बहन और भाई ने मदद की। बच्ची अभी ठीक से सांस भी नहीं ले पाई थी कि शेफाली ने बच्ची के सिर को बाथरूम की दीवार से दे मारा। इससे बच्ची की तुरंत मौत हो गई।
इसके बाद पूरे परिवार ने बच्ची को एक पॉलिथिन बैग में बंद किया और उसे खिड़की से सड़क के किनारे कूड़ेदान में फेंक दिया। दूसरे दिन जब कूड़ेवाले ने पॉलिथिन में बच्ची के शव को देखा, तो उसके होश उड़ गए। उसने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने जांच के बाद शेफाली को गिरफ्तार कर लिया।
मीरा रोड पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर मुकुंद महाजन ने बताया कि पोस्टमार्ट रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हुई है कि बच्ची की मौत सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण हुई है। शेफाली ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। शेफाली ने बताया कि बच्ची के पिता ने प्रेगनंट होने के बाद उससे शादी का वादा किया था। छह महीने बाद वह इससे मुकर गया। शेफाली ने बताया कि इसके बाद उसके परिवार वाले उसे घर से बाहर निकालने के लिए धमकाने लगे। शेफाली के घरवाले बच्चे को स्वीकार करने के लिए राजी नहीं थे। शेफाली ने बच्ची के पिता का नाम बताने से इनकार कर दिया है। पुलिस के मुताबिक बच्ची का पिता शेफाली का ही कोई सहकर्मी हो सकता है। शायद आप भी खबर पढ़कर मेरी ही तरह आवाक हो गए होंगे। पर मां को कंस कहने से पहले इस सवाल पर विचार करना जरुरी हो जाता है कि इस घटना का असली दोषी कौन है वह महिला उसके परिवार के लोग उसका प्रेमी या पूरा समाज। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते आप इस सवाल का उत्तर जरूर तलाश करेंगे। उत्तर मिल सके तो मुझे भी बताएं।

9 comments:

राजीव तनेजा said...

दिमाग घूम जाता है ऐसी खबरें सुनकर कि क्या कोई माँ इतनी निर्दयी भी हो सकती है?

लेकिन अगर परिस्तिथियों को देखा जाए तो असल गुनहगार उसके अपने परिवार वाले और वो शक्स है जिसने उसे गर्भवती बनाया।

Udan Tashtari said...

ऐसे सवालों का क्या जबाब मिलेगा?

बस, सन्न रह जाईये.

राधिका बुधकर said...

हे भगवान ! कितना भी मानसिक तनाव हो तो भी कोई माँ अपने बच्चे की इस तरह हत्या कर सकती हैं ?छि . यह बहुत ही भयंकर हैं ,दुखद . सामाजिक सत्य ,इसमे दोष पुरे समाज का ही हैं लेकिन सबसे ज्यादा उस लड़की का ,की वह अपने बच्ची को पालने की हिम्मत भी न कर सकी,उसे सँभालने सहेजने के बजाय ,उसे मार ही डाला .जो भी हुआ था उसमे उस नन्ही बच्ची का क्या दोष था ?माँ होकर भी ऐसा करना किसी भी कारण से कम घृणित नही हैं ,यह अघोर पाप हैं .निंदनीय हैं .

'Yuva' said...

Nice Blog..keep it up.
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प्रदीप कांत said...

परिस्थिति कुछ भी करवा सकती है. किन्तु यह समझ के बाहर है कि कौनसा प्रेम या मजबूरी है कि बच्ची के पिता का नाम सामने नहीं आ रहा है?

Swet said...

I am feeling shame.. not to the mother but to the person who refused to take the pride of being father...

विवेक भटनागर said...

CHAIGHAR KI CHUSKIYAN KAHAN GAYEEN, DOST? TALAB LAG RAHI HAI.

Dr. Ahmad Ali Barqi Azmi said...

है मेरा वतन भी आज़मगढ
ब्रजेश जहाँ के वासी हैँ

जो ज़र्रा वहाँ से उठता है
वह नय्यर-ए-आज़म होता है
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
नई दिल्ली

SUDHA UPADHYAYA said...

KAISE HAIN BRAJESH BHAI kabhi fursat nikaliye hamare liye bhi ye kaljug hai santo ne theek hi kaha hai TERA MERA MANUWA KAISE IK HOYI RE.warna abtak humsabhi yahi jaante the MAA EK SHABD BHAR NAHI EK SAMPURNA BHASHA HAI.ab kya kijiyega bhasha bhi parayi ho chuki samskaar bhi mera blog bhi gahe bagahe khol liya karen saDHANYABAAD SUDHA UPADHYAYA.