Thursday, November 22, 2007

कुछ बातें हो जाएँ

बातों से क्या नहीं हो सकता ? दुनिया के बडे से बडे मसले हल हो जाते हैं मन की भड़ास निकल जाती है दिल का दर्द कम हो जाता है बातों से ही कोई बेगाना अपना हो जाता है लेकिन आज किसी के पास बात करने की फुरसत ही नहीं बस या ट्रेन में घंटों साथ-साथ यात्रा करते हैं लेकिन आपस में दो शब्द तक नहीं बोलते ग़ैर तो छोडिये अपनों से भी बात करने का समय नहीं रहा इससे पहले कि हम बात करना ही भूल जाएँ और लाफिंग थेरेपी की तरह टाकिंग थेरपी लेनी पड़े क्यों न हम बात करने की आदत को बनाए रखें तो चलिए कुछ बातें करते हैं, कुछ अपनी और ढेर सारी उनकी ...जिनके बारे में कोई बात नहीं करता

3 comments:

ब्रजेश said...

jee han yah such baat hai. hume baat to karni hee chaie

अनुराग मिश्र said...

bilkul sahi kaha apne Brijesh ji. Akhir bato ke mahatava ko kaun inkar kar sakta hai. yahi hai hai jo dil ka sara haal kahti, kahti hai dard, khushiya.

Pushpa said...

Hi, Pushpa here.Leave your contact number on my mail id.
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