Thursday, December 11, 2008

बेरोजगार लड़के

वे मिल जाएंगे कहीं भी
झुंड में बैठे हुए
किसी चाय की दुकान पर
या कहीं भी उस जगह
जहां बैठा जा सके देर तक
अल्हड़ हवाओं की तरह
वे हंसते हैं बेफिक्र हंसी
बोलते-बोलते अकसर
देखने लगते है शून्य में
बुदबुदाते हैं
हवाओं में टांकते हैं गालियां
और हाथ में चाय की गिलास थामे
बांचते रहते हैं
गली की लड़की से लेकर
लादेन तक की कुंडली
उनके पास
सूचना और अफवाहों का
अथाह भंडार है
वे अफवाहों की सचाई में यकीन करते हैं
सच सी लगें अफवाहें
इसलिए
उनमें कुछ अफवाहें और भी जोड़ देते हैं
उन्हें कभी भी आवाज लगाई जा सकती है
मंगवाई जा सकती है बाजार से सब्जी
वे जमा करा सकते हैं पानी-बिजली का बिल
मरीज को पहुंचाना हो अस्पताल
तो उठाया जा सकता है उन्हें आधी रात में
वे अच्छे बच्चे हैं
किसी काम के लिए ना नहीं करते
ना करने पर कहा जा सकता है उन्हें
बेकार और आवारा

5 comments:

Mired Mirage said...

सही कह रहे हैं ।
घुघूती बासूती

अनूप शुक्ल said...

बेहतरीन कविता। इस पर चर्चा भी हुई और लोगों ने बहुत पसंद किया।
http://chitthacharcha.blogspot.com/2008/12/blog-post_12.html

dr. ashok priyaranjan said...

िजंदगी की सच्चाई को आपने बडे मामिॆक तरीके से शब्दबद्ध किया है । अच्छा िलखा है आपने । मैने अपने ब्लाग पर एक लेख िलखा है-आत्मिवश्वास के सहारे जीतें िजंदगी की जंग-समय हो तो पढें और प्रितिक्रया भी दें-

http://www.ashokvichar.blogspot.com

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

उन्हें कभी भी आवाज लगाई जा सकती है
मंगवाई जा सकती है बाजार से सब्जी
वे जमा करा सकते हैं पानी-बिजली का बिल
मरीज को पहुंचाना हो अस्पताल
तो उठाया जा सकता है उन्हें आधी रात में
वे अच्छे बच्चे हैं
किसी काम के लिए ना नहीं करते
ना करने पर कहा जा सकता है उन्हें
बेकार और आवारा

बहुत सुंदर - काश इन लड़कों को दिग्दर्शन मिल सकता!

Anonymous said...

Excellent presentation of truth which is a part of all individual life [it's my thought]... I am able to recall my old days where i was falling under same category as described here... Muhalle ke bade aur budhijiwi kahte the " baap itna bada officer hai aur isko dekho... Bhagwan hi Malik hai".

Today, life is so busy that i am unable to stand on those corner which was my favourite place where we [Me and my friends] use to debate on politics, world economy, future plan etc... and ofcourse the mohalla beauty...

Today, we call those future gentleman as awara... Can some one suggest, how to get those time... as i really want to relax and spend time with cup of Tea and friends...

Thanks Brijesh...